नई दिल्ली (टेक न्यूज डेस्क): स्मार्टफोन की दुनिया में ऐप्स का बोलबाला अब सांसें ले रहा है। अमेज़न के डिवाइसेस एंड सर्विसेज हेड और अलेक्सा के चीफ पैनोस पनाय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सनसनीखेज खुलासा किया है। उनका कहना है कि मोबाइल ऐप्स का दौर खत्म होने वाला है। आने वाला भविष्य एआई-ड्रिवन एम्बिएंट कंप्यूटिंग का होगा, जहां तकनीक हमारे आसपास घुल-मिल जाएगी, बिना स्क्रीन की ज़रूरत के।
पनाय, जो माइक्रोसॉफ्ट से अमेज़न में आए हैं, ने फॉर्च्यून मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा, “हमने अभी तक एआई डिवाइसेस का अगला फॉर्म फैक्टर नहीं देखा। लेकिन जल्द ही ऐसा होगा जब ऐप्स की जगह सोचने मात्र से काम हो जाएगा।” उनका यह बयान युवा पीढ़ी की बदलती आदतों से जुड़ा है। जेन-जेड और मिलेनियल्स को ‘डूम स्क्रॉलिंग’ से तंग आ चुके हैं वह अंतहीन स्क्रॉल जहां सोशल मीडिया पर घंटों बिताने से मानसिक थकान होती है। पनाय का मानना है कि स्मार्टफोन स्क्रीन का युग अब टिपिंग पॉइंट पर पहुंच गया है।
ऐप्स से एम्बिएंट इंटेलिजेंस तक का सफर
सोचिए, एक ऐसी दुनिया जहां आपको उबर बुक करने के लिए ऐप खोलने की ज़रूरत न पड़े। बस आवाज़ से कहें, “मुझे एयरपोर्ट ड्रॉप कर दो,” और कार खुद आ जाए। या फिर, घर में लाइट्स ऑन करने के लिए अलेक्सा को कमांड दें, बिना फोन छुए। पनाय ने बताया कि अमेज़न के लैब में ऐसे कई आइडियाज पर काम चल रहा है। एआई न सिर्फ ऐप्स को रिप्लेस करेगा, बल्कि डिवाइसेस को ‘एम्बिएंट’ बना देगा – मतलब, तकनीक बैकग्राउंड में काम करेगी, यूजर को परेशान किए बिना।
यह बदलाव सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा है। पनाय ने कहा, “युवा पीढ़ी थक चुकी है स्क्रीन से। हम सोचने का तरीका बदलने वाले हैं।” हाल के सर्वे बताते हैं कि 70% से ज़्यादा जेन-जेड यूज़र्स स्मार्टफोन की लत से परेशान हैं। एआई असिस्टेंट्स जैसे अलेक्सा, गूगल असिस्टेंट या सरि पहले से ही वॉयस कमांड्स पर निर्भर हैं, लेकिन अब यह अगले स्तर पर जाएगा – वियरेबल्स, स्मार्ट होम्स और यहां तक कि ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तक।
भारत में क्या असर?
भारत जैसे डिजिटल हब में यह क्रांति तेज़ी से फैलेगी। जहां 80 करोड़ से ज़्यादा स्मार्टफोन यूज़र्स हैं, वहां ऐप इकोनॉमी 2025 में 5 लाख करोड़ रुपये की हो चुकी है। लेकिन पनाय के विज़न से स्टार्टअप्स को नया मौका मिलेगा। स्वदेशी एआई टूल्स जैसे जियो का जियोब्रेन या पेटीएम का वॉयस पेमेंट सिस्टम एम्बिएंट मॉडल में शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि, चैलेंज भी हैं – प्राइवेसी, डेटा सिक्योरिटी और डिजिटल डिवाइड। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रामीण भारत में वॉयस-बेस्ड एआई ही समाधान होगा, जहां लिटरेसी बैरियर है।
अमेज़न पहले से ही एक्शन में है। 2026 में लॉन्च होने वाले नए अलेक्सा डिवाइसेस में ‘थॉट कमांड’ फीचर की अफवाहें हैं, जो न्यूरल लिंक्स जैसी टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। पनाय ने हंसते हुए कहा, “फोन की मौत नहीं, बल्कि ऐप्स की विदाई होगी। हम फ्री हो जाएंगे।”
नया भविष्य: उम्मीद या चिंता?
यह बदलाव तकनीकी क्रांति का हिस्सा है, लेकिन सवाल उठता है – क्या हम तैयार हैं? डेवलपर्स को ऐप स्टोर्स से हटकर क्लाउड-बेस्ड सर्विसेज पर फोकस करना पड़ेगा। गूगल और एप्पल भी पीछे नहीं। गूगल का जेमिनी एआई पहले से वॉयस-ओनली मोड टेस्ट कर रहा है। कुल मिलाकर, पनाय का विज़न एक ऐसी दुनिया का है जहां टेक हमारा साथी बने, बोझ नहीं।
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