मोबाइल की लत से बच्चों की नींद पर असर, मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा आज एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल डिवाइस अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, हर काम के लिए मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डाल रहा है, जिसे नजरअंदाज करना अब मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल की लत से बच्चों की नींद पर असर सबसे पहले दिखाई देता है। देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत बच्चों के सोने के समय को बिगाड़ रही है। मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित करती है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है। इसके कारण बच्चों को देर से नींद आती है, नींद पूरी नहीं हो पाती और सुबह उठने में परेशानी होती है। लगातार नींद की कमी बच्चों की एकाग्रता, याददाश्त और सीखने की क्षमता को भी कमजोर कर रही है।
मोबाइल की लत केवल नींद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा भी बन रही है। लंबे समय तक सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और वीडियो देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव बढ़ रहा है। कई मामलों में बच्चों में आत्मविश्वास की कमी, अवसाद और अकेलापन जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं। ऑनलाइन दुनिया में जरूरत से ज्यादा समय बिताने से बच्चे वास्तविक सामाजिक संपर्क से दूर हो रहे हैं, जिससे उनके व्यवहार में नकारात्मक बदलाव आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल की लत से बच्चों की नींद पर असर और मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब नींद पूरी नहीं होती, तो दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता, जिसका सीधा असर बच्चों के मूड और सोचने की क्षमता पर पड़ता है। स्कूल में प्रदर्शन कमजोर होना, बात-बात पर गुस्सा आना और छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना इसके सामान्य लक्षण हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए अभिभावकों की भूमिका बेहद अहम है। बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की एक तय सीमा बनाना, सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य गैजेट्स से दूरी बनाना और उन्हें खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। साथ ही, माता-पिता को खुद भी मोबाइल के सीमित उपयोग का उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि बच्चे सही आदतें सीख सकें।
कुल मिलाकर, मोबाइल की लत से बच्चों की नींद पर असर, मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा एक चेतावनी है कि तकनीक का संतुलित और समझदारी भरा इस्तेमाल ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की कुंजी है। समय रहते इस पर ध्यान दिया गया, तो बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।



