वाशिंगटन/काराकास (न्यूज़ डेस्क द्वारा)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के साथ बढ़ते तनाव को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। व्हाइट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा, “वेनेज़ुएला का वर्तमान शासन अमेरिकी हितों के लिए खतरा है। हम उनकी तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर जरूरी हुआ, तो हम कड़े कदम उठाएंगे – चाहे वो आर्थिक प्रतिबंध हों या सैन्य हस्तक्षेप।” यह बयान ऐसे समय आया है जब वेनेज़ुएला ने हाल ही में अमेरिकी तेल कंपनियों पर हमले की धमकी दी है।
ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भूचाल ला सकता है। 2025 के अंत में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अपनी सेना को सीमा पर तैनात करने का आदेश दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव ऑयल रिजर्व्स को लेकर है, जहां वेनेज़ुएला दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार का मालिक है। ट्रंप ने आगे कहा, “हमारे सहयोगी देशों के साथ मिलकर हम इस संकट का समाधान निकालेंगे। लेकिन मादुरो को पता होना चाहिए कि अमेरिका कभी पीछे नहीं हटता।”
पृष्ठभूमि: क्यों भड़का विवाद?
वेनेज़ुएला का संकट 2010 के दशक से चला आ रहा है। हाइपरइन्फ्लेशन, भोजन की कमी और राजनीतिक दमन ने लाखों लोगों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अमेरिका ने 2019 से मादुरो सरकार पर कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन हाल के महीनों में तनाव चरम पर पहुंच गया। दिसंबर 2025 में वेनेज़ुएला ने गयाना के साथ सीमा विवाद में सैन्य अभ्यास किया, जिसे अमेरिका ने “उकसावे” का नाम दिया। ट्रंप प्रशासन ने तुरंत नौसेना के जहाजों को कैरिबियन सागर में भेजा।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले, ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूत करना चाहते हैं। लैटिन अमेरिका विशेषज्ञ डॉ. एना रॉड्रिगेज ने एनबीसी को बताया, “ट्रंप का यह बयान वेनेज़ुएला को कमजोर करने का प्रयास है, लेकिन इससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।”
वैश्विक प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने मध्यस्थता की पेशकश की, जबकि रूस और चीन – वेनेज़ुएला के प्रमुख सहयोगी – ने अमेरिका की आलोचना की। रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने कहा, “ट्रंप की धमकियां साम्राज्यवादी हैं।” दूसरी ओर, ब्राजील और कोलंबिया जैसे पड़ोसी देश अमेरिका के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
भारत ने भी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम शांतिपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं।” वैश्विक तेल कीमतें पहले ही 5% गिर चुकी हैं, क्योंकि निवेशक इस तनाव से चिंतित हैं।
आगे क्या?
ट्रंप का बयान वेनेज़ुएला को वार्ता की मेज पर ला सकता है या युद्ध की आग भड़का सकता है। अगले हफ्ते ओपेक की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। फिलहाल, दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। दुनिया की नजरें इस लैटिन अमेरिकी संकट पर टिकी हैं।



