लखनऊ (न्यूज ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा अब और गहराता जा रहा है। ताजा मामला कानपुर का है, जहां 10 साल के एक मासूम बच्चे की अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बच्चों में बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों की ओर इशारा करती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह दिल की बीमारी या प्रदूषण से जुड़ी समस्या हो सकती है, जो राज्य में तेजी से फैल रही है।
घटना मंगलवार शाम की है, जब कानपुर के घाटमपुर इलाके में रहने वाला 10 वर्षीय राहुल खेलते-खेलते अचानक बेहोश हो गया। परिवार वाले उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्रारंभिक जांच से हार्ट अटैक का संकेत मिला है, हालांकि पूरी रिपोर्ट का इंतजार है। राहुल के पिता, एक मजदूर, ने बताया, “वो बिल्कुल ठीक था। सुबह स्कूल गया, शाम को खेल रहा था। अचानक ऐसा क्या हुआ? हमारा तो सब कुछ लुट गया।” मां की हालत सदमे से खराब है, और गांव वाले इस घटना से सहमे हुए हैं।
यह सिर्फ एक इंसिडेंट नहीं है। उत्तर प्रदेश में बच्चों में बढ़ता खतरा अब आंकड़ों में भी दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग के हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल राज्य में 5 से 15 साल के बच्चों में अचानक मौत के मामलों में 20% की वृद्धि दर्ज की गई। वजहें कई हैं – वायु प्रदूषण, कुपोषण, और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली। कानपुर जैसे औद्योगिक शहरों में पीएम 2.5 का स्तर WHO के मानकों से कई गुना ज्यादा है, जो बच्चों के फेफड़ों और दिल पर असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद से बच्चों में दिल की समस्याएं बढ़ी हैं।
डॉ. अजय शर्मा, लखनऊ के एक बाल रोग विशेषज्ञ, ने कहा, “बच्चों में बढ़ता खतरा चिंताजनक है। UP में 10 साल के मासूम की अचानक मौत जैसे केस प्रदूषण और पोषण की कमी से जुड़े हैं। अभिभावकों को नियमित चेकअप कराना चाहिए। सरकार को स्कूलों में स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करनी चाहिए।” राज्य सरकार ने इस पर संज्ञान लिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं और कहा, “हम बच्चों की सुरक्षा के लिए नए कार्यक्रम ला रहे हैं, जैसे फ्री मेडिकल कैंप और प्रदूषण नियंत्रण।”
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम पर्याप्त हैं? ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता का अभाव समस्या को बढ़ा रहा है। एनजीओ ‘चाइल्ड हेल्थ फाउंडेशन’ की रिपोर्ट बताती है कि UP में हर साल हजारों बच्चे ऐसी अचानक मौतों का शिकार होते हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। सोशल मीडिया पर #SaveUPKids ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों में बढ़ता खतरा कब रुकेगा? परिवारों को सतर्क रहने की जरूरत है, और समाज को मिलकर इस समस्या से लड़ना होगा। अधिक जानकारी के लिए बने रहें।



