नई दिल्ली: आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Technology) हर जगह छाया हुआ है। चैटबॉट से लेकर इमेज जेनरेशन तक, AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की यह बढ़ती ‘भूख’ आपके मोबाइल और लैपटॉप की कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर रही है? जी हां, इसकी अंदर की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। आइए, विस्तार से समझते हैं।
सबसे पहले बात करें AI की ‘भूख’ की। AI मॉडल्स को चलाने के लिए हाई-पावर प्रोसेसर्स, जैसे एनवीडिया के जीपीयू या क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन चिप्स की जरूरत पड़ती है। ये चिप्स डेटा प्रोसेसिंग में इतनी तेजी से काम करते हैं कि सामान्य डिवाइसेज उन्हें हैंडल नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप, मोबाइल और लैपटॉप निर्माता कंपनियां इन एडवांस्ड चिप्स को इंटीग्रेट कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, सैमसंग गैलेक्सी S24 सीरीज में AI फीचर्स जैसे रियल-टाइम ट्रांसलेशन और इमेज एडिटिंग जोड़े गए हैं, जो स्पेशलाइज्ड हार्डवेयर पर निर्भर हैं। इसी तरह, एप्पल के M2 और M3 चिप्स AI टास्क्स के लिए ऑप्टिमाइज्ड हैं।
लेकिन समस्या यहां से शुरू होती है। इन चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग महंगी है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में TSMC और इंटेल जैसी कंपनियां प्रमुख हैं, जो AI डिमांड के कारण प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं। 2023-24 में AI बूम से चिप्स की ग्लोबल डिमांड 30% बढ़ी, जिससे सप्लाई चेन में कमी आई। कोविड के बाद की रिकवरी, जियोपॉलिटिकल टेंशन्स (जैसे यूएस-चाइना ट्रेड वॉर) और रॉ मटेरियल्स की कमी ने कीमतें और ऊपर कर दीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाई-एंड जीपीयू की कीमत 20-50% तक बढ़ गई है।
अब मोबाइल और लैपटॉप पर असर। एक सामान्य स्मार्टफोन की कीमत पहले 20-30 हजार रुपये होती थी, लेकिन AI इंटीग्रेशन के साथ अब 50 हजार से ऊपर पहुंच रही है। गूगल पिक्सल 8 में AI-पावर्ड कैमरा फीचर्स ने इसकी कीमत बढ़ाई। लैपटॉप्स में भी यही हाल है। डेल और एचपी के नए मॉडल्स में AI असिस्टेंट जैसे कोपायलट जोड़ने से कॉस्ट 15-20% बढ़ा। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि AI की पावर कंजम्प्शन भी ज्यादा है, जिससे बैटरी और कूलिंग सिस्टम महंगे हो रहे हैं।
क्या यह ट्रेंड रुकेगा? शॉर्ट टर्म में नहीं। मार्केट रिसर्च फर्म IDC के अनुसार, 2025 तक AI-इनेबल्ड डिवाइसेज की बिक्री दोगुनी हो जाएगी, जिससे कीमतें और बढ़ेंगी। हालांकि, लॉन्ग टर्म में क्लाउड-बेस्ड AI (जैसे ChatGPT) लोकलाइज्ड हार्डवेयर की जरूरत कम कर सकता है। लेकिन फिलहाल, कंज्यूमर्स को महंगे डिवाइसेज के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
यह कहानी सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं, बल्कि इकोनॉमिक्स और इनोवेशन की है। AI हमें स्मार्ट बनाता है, लेकिन उसकी कीमत हमारी जेब पर भारी पड़ रही है। क्या आप भी महंगे गैजेट्स से परेशान हैं? कमेंट्स में बताएं।



