मोबाइल के हर पुर्जे होंगे मेड इन इंडिया, यह सपना अब तेजी से हकीकत में बदलता नजर आ रहा है। भारत सरकार की नई औद्योगिक और तकनीकी नीतियों के चलते देश मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देख रहा है। अब तक जहां भारत मोबाइल असेंबलिंग तक सीमित माना जाता था, वहीं आने वाले वर्षों में मोबाइल फोन के चिपसेट, डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा मॉड्यूल और अन्य अहम पुर्जों का निर्माण भी देश में ही होने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई रफ्तार दी है। केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत देशी और विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका असर यह हुआ है कि कई बड़ी मोबाइल कंपनियों ने भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार किया है और सप्लाई चेन को स्थानीय बनाने पर काम शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल के हर पुर्जे होंगे मेड इन इंडिया होने से भारत को कई स्तरों पर फायदा होगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके साथ ही देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। अनुमान है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लाखों युवाओं को रोजगार देगा, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
भारत बनेगा टेक्नोलॉजी हब, इस लक्ष्य के पीछे केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार और निजी कंपनियां मिलकर सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइन और एडवांस टेक्नोलॉजी पर निवेश बढ़ा रही हैं। हाल ही में सेमीकंडक्टर प्लांट्स की घोषणा ने यह संकेत दिया है कि भारत भविष्य की तकनीक में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
मोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि जब मोबाइल के सभी पुर्जे देश में बनने लगेंगे, तब भारत न सिर्फ घरेलू मांग को पूरा करेगा बल्कि वैश्विक बाजार में भी मजबूत निर्यातक के रूप में उभरेगा। इससे भारत की पहचान केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में बनेगी।
कुल मिलाकर, मोबाइल के हर पुर्जे होंगे मेड इन इंडिया का लक्ष्य भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि मौजूदा नीतियों और निवेश की गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब देशों की सूची में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।



