क्या मोबाइल टावर से होता है कैंसर? सच जानकर चौंक जाएंगे आप!
नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026 (हेल्थ डेस्क): आज के डिजिटल युग में मोबाइल टावर हर जगह दिखते हैं, लेकिन इनसे निकलने वाली रेडिएशन को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा डर बैठा है – क्या ये टावर कैंसर का कारण बनते हैं? सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें और पुरानी मान्यताएं इस डर को और बढ़ाती हैं। लेकिन वैज्ञानिक सबूत और सरकारी रिपोर्ट्स क्या कहती हैं? हमने गहराई से जांच की और पाया कि सच्चाई आपके सोच से बिलकुल अलग है। आइए, तथ्यों पर नजर डालें और मिथकों को दूर करें।
मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) कहा जाता है। ये रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगें हैं, जो नॉन-आयोनाइजिंग होती हैं। मतलब, ये डीएनए को नुकसान पहुंचाने वाली नहीं हैं, जैसी कि एक्स-रे या यूवी रेज होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 25 हजार से ज्यादा स्टडीज के बाद स्पष्ट कहा है कि मोबाइल टावरों की रेडिएशन से कैंसर का कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने भी हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि यह सिर्फ एक मिथ है। DoT के अनुसार, टावरों से निकलने वाली रेडिएशन सख्त EMF मानकों के तहत नियंत्रित होती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय सीमाओं से भी कम है।
फिर भी, कुछ लोग दावा करते हैं कि टावरों के पास रहने से सिरदर्द, थकान या यहां तक कि कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण अन्य कारणों से हो सकते हैं, जैसे तनाव या प्रदूषण। फोर्टिस हेल्थकेयर के एक ब्लॉग में लिखा है कि वैज्ञानिक समुदाय पूरी तरह एकमत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। वहीं, मैक्स हेल्थकेयर की रिपोर्ट में कहा गया कि बेस स्टेशनों से ऊर्जा का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन ये अध्ययन सीमित हैं और बड़े पैमाने पर प्रमाणित नहीं। हाल के अध्ययनों में, जैसे कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की रिपोर्ट, मोबाइल फोन रेडिएशन को ‘संभावित कार्सिनोजेन’ क्लासिफाई किया गया है, लेकिन टावरों के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं। भारत में रेडिएशन लेवल ICNIRP गाइडलाइंस से 10 गुना कम रखा जाता है।
सरकार ने क्या कदम उठाए? DoT ने टावरों की जांच के लिए ‘तरंग संचार’ पोर्टल लॉन्च किया है, जहां कोई भी अपनी लोकेशन की रेडिएशन लेवल चेक कर सकता है। पूर्व दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी संसद में कहा था कि रेडिएशन से कोई नुकसान नहीं। हाल की पोस्ट में DoT ने साफ किया कि बड़े टावर छोटों से ज्यादा रेडिएशन नहीं फैलाते; बल्कि, ये सुरक्षित हैं। लेकिन कुछ डॉक्टर, जैसे जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर अरुण चौगुले, कहते हैं कि लंबे समय तक हाई एक्सपोजर से जोखिम हो सकता है, इसलिए दूरी बनाएं।
सच्चाई यह है कि मोबाइल टावरों से कैंसर का डर ज्यादातर अफवाहों पर आधारित है। स्टडीज दिखाती हैं कि फोन का ज्यादा इस्तेमाल टावरों से ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है, लेकिन वो भी प्रमाणित नहीं। अगर आप चिंतित हैं, तो सरकारी पोर्टल चेक करें या डॉक्टर से सलाह लें। याद रखें, विज्ञान अफवाहों से बड़ा है – डरें नहीं, जागरूक रहें!



