नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की चिंता के बीच, पुरानी कार को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना एक क्रांतिकारी विकल्प बन रहा है। अगर आप भी अपनी पुरानी कार से तंग आ चुके हैं और ईंधन पर हर महीने हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, तो इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट का इस्तेमाल करके आप मोटी बचत कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तरीका न केवल किफायती है बल्कि पर्यावरण-अनुकूल भी। आइए जानते हैं पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप।
क्यों चुनें इलेक्ट्रिक कन्वर्जन?
भारत में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ईंधन की लागत और प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। पुरानी कार को इलेक्ट्रिक बनाकर आप सालाना 50,000 से 1 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक सामान्य पेट्रोल कार 10-12 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन में प्रति चार्ज 100-150 किमी की रेंज मिलती है और चार्जिंग लागत महज 50-100 रुपये। इसके अलावा, सरकार की ईवी पॉलिसी के तहत सब्सिडी और टैक्स छूट भी उपलब्ध है। दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में रेट्रोफिटिंग पर 10-20% की सब्सिडी मिल रही है।
क्या है रेट्रोफिटिंग प्रक्रिया?
रेट्रोफिटिंग मतलब पुरानी कार के इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और कंट्रोलर लगाना। यह काम प्रमाणित वर्कशॉप में होता है। लागत 2-5 लाख रुपये तक आ सकती है, जो कार के मॉडल पर निर्भर करता है। छोटी कारों जैसे मारुति 800 या अल्टो के लिए 2-3 लाख, जबकि बड़ी कारों जैसे स्विफ्ट या इंडिका के लिए 4-5 लाख। लेकिन 2-3 साल में यह लागत वसूल हो जाती है, क्योंकि मेंटेनेंस खर्च कम होता है – कोई ऑयल चेंज, फिल्टर या क्लच नहीं।
स्टेप बाय स्टेप तरीका:
- कार का चयन और जांच: सबसे पहले अपनी पुरानी कार की जांच करवाएं। इंजन, चेसिस और ब्रेक सिस्टम मजबूत होना चाहिए। RTO से अनुमति लें, क्योंकि रेट्रोफिटिंग के बाद री-रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
- किट का चुनाव: बाजार में कई कंपनियां जैसे ई-टेक या हाइब्रिड किट्स उपलब्ध हैं। लिथियम-आयन बैटरी चुनें, जो 5-8 साल चलती है। मोटर पावर 10-20 kW पर्याप्त है। कीमत 1.5-3 लाख।
- इंस्टॉलेशन: प्रमाणित मैकेनिक से करवाएं। इंजन हटाकर मोटर लगाएं, बैटरी पैक इंस्टॉल करें और वायरिंग करें। चार्जिंग पोर्ट और डैशबोर्ड पर बैटरी इंडिकेटर जोड़ें। पूरा काम 7-10 दिन में हो जाता है।
- टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन: इंस्टॉलेशन के बाद रोड टेस्ट करें। ARAI या RTO से अप्रूवल लें। इससे इंश्योरेंस और रोड टैक्स में छूट मिलती है।
चुनौतियां और टिप्स:
हालांकि फायदेमंद, लेकिन बैटरी की रेंज 100-200 किमी तक सीमित रह सकती है, इसलिए लंबी ट्रिप के लिए प्लानिंग जरूरी। चार्जिंग स्टेशन की कमी एक समस्या है, लेकिन घर पर सोलर चार्जिंग से बचत बढ़ाएं। विशेषज्ञ सलाह: हमेशा वारंटी वाली किट चुनें और लोकल वर्कशॉप से बचें।
सफल उदाहरण:
दिल्ली के एक टैक्सी ड्राइवर ने अपनी 10 साल पुरानी इंडिका को इलेक्ट्रिक बनाया और अब महीने में 20,000 रुपये बचा रहे हैं। इसी तरह, बेंगलुरु में कई स्टार्टअप रेट्रोफिटिंग सर्विस दे रहे हैं।
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक बनाकर न केवल पैसे बचाएं बल्कि पर्यावरण बचाएं। अगर आप तैयार हैं, तो आज ही लोकल डीलर से संपर्क करें।



