Electricity Through The Air: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने हवा के माध्यम से बिजली ट्रांसमिट करने में सफलता हासिल की है, जो निकोला टेस्ला के 120 साल पुराने सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उपलब्धि वायरलेस बिजली ट्रांसमिशन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है, जहां केबल्स और प्लग्स की जरूरत खत्म हो जाएगी।
फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को विकसित किया है। उन्होंने अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स और लेजर बीम्स का इस्तेमाल करके हवा में बिजली भेजने का तरीका खोजा। उच्च तीव्रता वाली अल्ट्रासोनिक तरंगें हवा में एक अदृश्य पाथ बनाती हैं, जो इलेक्ट्रिकल स्पार्क्स को नियंत्रित तरीके से गाइड करती हैं। साथ ही, लेजर बीम्स ऊर्जा को निर्देशित करने में मदद करते हैं। प्रयोगशाला स्तर पर यह तकनीक छोटी दूरी पर बिजली ट्रांसफर करने में सफल रही है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
यह ब्रेकथ्रू मैग्नेटो-इंडक्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जहां हाई-फ्रीक्वेंसी मैग्नेटिक फील्ड्स और सुपरकंडक्टिंग रिसीवर्स का उपयोग होता है। पारंपरिक वायरलेस चार्जिंग पैड्स से अलग, यह सिस्टम लंबी दूरी पर न्यूनतम लॉस के साथ ऊर्जा ट्रांसमिट कर सकता है। फिनलैंड के इंजीनियर्स ने इसे ओपन स्पेस में टेस्ट किया, जहां बिना किसी फिजिकल कनेक्शन के बिजली प्रवाहित हुई। इस तकनीक के फायदे अनेक हैं। स्मार्ट सिटी में यह क्रांति ला सकती है, जहां ड्रोन मिड-फ्लाइट में चार्ज हो सकेंगे, फैक्टरियां वायरिंग-फ्री चलेंगी और फोन ऑटोमैटिक चार्जिंग से जुड़ जाएंगे। ऊर्जा वितरण में यह ग्रिड की कमजोरियों को दूर करेगा, जैसे ट्रांसफॉर्मर्स और पावर लाइंस की जरूरत कम होगी। पर्यावरण के लिहाज से भी यह फायदेमंद है, क्योंकि केबल्स से जुड़ी बर्बादी घटेगी।
निकोला टेस्ला ने 19वीं सदी के अंत में वायरलेस पावर का विचार दिया था, लेकिन तकनीकी सीमाओं के कारण यह सपना अधूरा रहा। अब फिनलैंड की यह सफलता टेस्ला की विरासत को आगे बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एनर्जी सेक्टर को बदल देगी, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी के साथ मिलकर। हालांकि, अभी यह प्रायोगिक चरण में है और सुरक्षा, दक्षता जैसे मुद्दों पर काम बाकी है।
फिनलैंड सरकार इस रिसर्च को सपोर्ट कर रही है, जो देश को ग्लोबल इनोवेशन लीडर बनाने की दिशा में है। आने वाले सालों में यह तकनीक कमर्शियल रूप ले सकती है, जो दुनिया भर में ऊर्जा क्रांति लाएगी।



