नई दिल्ली: डिजिटल न्यूज डेस्क आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमारा साथी बन चुके हैं, लेकिन ये ‘दोस्त’ कहीं कहीं दुश्मन तो नहीं बन रहे? हाल के अध्ययनों से साफ है कि मोबाइल की लत से न सिर्फ नींद का चक्र बिगड़ रहा है, बल्कि तनाव और चिंता के स्तर में भी खतरनाक उछाल आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है, जो लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आइए, जानते हैं इसकी गहराई और समाधान।
लत का जाल: क्यों फंस जाते हैं हम?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और टिकटॉक डोपामाइन हार्मोन को ट्रिगर करते हैं, जो हमें बार-बार स्क्रॉल करने पर मजबूर कर देता है। डॉ. अनिता शर्मा, दिल्ली के एम्स में साइकेट्री विभाग की प्रमुख, बताती हैं, “रात को सोने से पहले 30 मिनट मोबाइल यूज करने वाले 70% युवाओं की नींद में गड़बड़ी पाई जाती है। नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को दबाती है, जिससे इंसोम्निया (अनिद्रा) का खतरा बढ़ जाता है।” एक सर्वे के मुताबिक, भारत में 18-25 साल के 60% लोग रात 11 बजे के बाद भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, जिससे सुबह थकान और दिनभर चिड़चिड़ापन महसूस होता है।
यह लत तनाव को भी बढ़ावा देती है। कंटेंट की बाढ़ में तुलना की भावना जागती है दूसरों की चमकदार जिंदगी देखकर खुद को कमतर समझना। मनोवैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार कहते हैं, “FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) सिंड्रोम से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ता है। इससे हृदय रोग और डिप्रेशन का जोखिम दोगुना हो जाता है।” WHO की रिपोर्ट भी चेतावनी देती है कि डिजिटल व्यसन महामारी बन चुका है।
एक्सपर्ट्स के टिप्स: कैसे तोड़ें यह चक्र?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छोटे-छोटे बदलाव से बड़ी राहत मिल सकती है। सबसे पहले, ‘डिजिटल डिटॉक्स’ अपनाएं। डॉ. शर्मा सुझाती हैं, “रात 8 बजे के बाद मोबाइल को ‘नो-फ्लाई जोन’ बनाएं। इसके बजाय किताब पढ़ें या मेडिटेशन करें।” ऐप्स जैसे ‘स्क्रीन टाइम’ ट्रैकर से दैनिक लिमिट सेट करें दिन में 2 घंटे से ज्यादा न यूज करें।
योग विशेषज्ञ योगिता मेहता जोड़ती हैं, “सुबह 10 मिनट प्राणायाम से तनाव कम होता है। सोशल मीडिया पर ‘माइंडफुल फॉलो’ करें—केवल सकारात्मक कंटेंट ही सब्सक्राइब करें।” अगर लत गंभीर हो, तो काउंसलिंग लें। एक स्टडी में पाया गया कि 21 दिनों के ब्रेक से नींद की क्वालिटी 40% सुधर जाती है।
समाज का आईना: क्या कहते हैं आंकड़े?
भारत में 80 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा सोशल मीडिया एडिक्टेड हैं। महामारी के बाद यह संख्या 25% बढ़ी। ग्रामीण इलाकों में भी अब यह समस्या फैल रही है। सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ ‘हेल्दी डिजिटल’ कैंपेन चला रही है, जो स्कूलों में जागरूकता फैला रहा। लेकिन जिम्मेदारी हमारी भी है बच्चों को उदाहरण बनें।
अंत में, तकनीक जीवन सुगम बनाए, लेकिन इसे गुलाम न बनने दें। स्वस्थ नींद और कम तनाव से ही सच्ची खुशी मिलेगी। अगर आपको भी यह समस्या लगे, तो आज से ही बदलाव शुरू करें। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।



