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Science

ब्रह्मांड का अदृश्य रहस्य सुलझेगा, वैज्ञानिकों ने तैयार किया नया सेंसर, अब ‘काली ताकत’ इंसानी नजरों से नहीं बचेगी

Piyush Agrawal
Last updated: January 5, 2026 06:52
Piyush Agrawal
Published: January 4, 2026
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नई दिल्ली (विज्ञान डेस्क): ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, जिसे ‘डार्क एनर्जी’ या ‘काली ताकत’ कहा जाता है, अब वैज्ञानिकों की पहुंच में आ सकती है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और यूरोपीय साउथर्न ऑब्जर्वेटरी (ईएसओ) के संयुक्त प्रयास से विकसित एक क्रांतिकारी सेंसर ने खगोलविदों को उत्साहित कर दिया है। यह नया उपकरण, जिसका नाम ‘डार्क प्रोब’ रखा गया है, ब्रह्मांड की 95 प्रतिशत अदृश्य ऊर्जा को सीधे मापने में सक्षम है। अब तक यह ‘काली ताकत’ सिर्फ गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों से अनुमानित होती रही, लेकिन अब यह इंसानी नजरों से नहीं छिप पाएगी।

डार्क एनर्जी ब्रह्मांड के विस्तार को तेज करने वाली वह रहस्यमयी शक्ति है, जो आकाशगंगाओं को एक-दूसरे से दूर धकेल रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्रह्मांड की कुल ऊर्जा का 68 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि डार्क मैटर 27 प्रतिशत। बाकी सिर्फ 5 प्रतिशत ही वह सामान्य पदार्थ है, जो हम देख सकते हैं। लेकिन अब ‘डार्क प्रोब’ सेंसर इस पहेली को सुलझाने का वादा कर रहा है। यह सेंसर क्वांटम सुपरकंडक्टर तकनीक पर आधारित है, जो प्रकाश की सबसे सूक्ष्म तरंगों को कैप्चर करता है। पारंपरिक टेलीस्कोपों से अलग, यह डार्क एनर्जी के कणों से निकलने वाली ‘घोस्ट सिग्नल्स’ को ट्रैक कर सकता है।

प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एलिजाबेथ रॉयड, नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी से, ने बताया, “यह सेंसर ब्रह्मांड की अदृश्य परत को उजागर करेगा। हमने लैब टेस्ट में डार्क एनर्जी के प्रभाव को 99.9 प्रतिशत सटीकता से मापा है। अब चिली के अटाकामा डेजर्ट में लगे ईएसओ टेलीस्कोप पर इसे इंस्टॉल किया जाएगा।” डॉ. रॉयड के अनुसार, यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित है, जो डेटा को रीयल-टाइम एनालिसिस करती है। पहले के उपकरण जैसे हबल या जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप सिर्फ अप्रत्यक्ष सबूत देते थे, लेकिन ‘डार्क प्रोब’ सीधे इंटरैक्शन कैप्चर करेगा।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है? कल्पना कीजिए, अगर हम डार्क एनर्जी की प्रकृति समझ लें, तो ब्रह्मांड के अंत का रहस्य खुल सकता है। क्या यह ‘बिग रिप’ का कारण बनेगी, जहां सब कुछ फट जाएगा, या ‘बिग क्रंच’ में सिकुड़ जाएगा? भारतीय खगोलशास्त्री डॉ. अनिल कुमार, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) से, ने कहा, “भारत का एस्क्रीम टेलीस्कोप भी इस तकनीक से जुड़ सकता है। यह नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों के लिए गेम-चेंजर होगा। डार्क एनर्जी समझना क्वांटम फिजिक्स और कॉस्मोलॉजी को नई दिशा देगा।”

हालांकि चुनौतियां बाकी हैं। सेंसर को कॉस्मिक रेडिएशन से बचाना और डेटा की विशालता को हैंडल करना मुश्किल होगा। लेकिन 2027 तक पहला फुल-स्केल ऑब्जर्वेशन शुरू होने की उम्मीद है। नासा के प्रवक्ता ने कहा, “यह मानवता की जिज्ञासा का नया अध्याय होगा। ब्रह्मांड अब छिपा नहीं रहेगा।”

वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर #DarkProbe ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा शोधकर्ता इसकी संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। क्या यह सेंसर ब्लैक होल के रहस्य भी सुलझाएगा? समय बताएगा। फिलहाल, ‘काली ताकत’ की दहशत खत्म होने वाली है। ब्रह्मांड अब और पारदर्शी हो रहा है।

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